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डॉ. मनोज कुमार सकलानी
सहायक प्राध्यापक
माँ पूर्णागिरि कॉलेज ऑफ एजुकेशन,
नाद बोरा, डाकघर – चम्पावत,
चम्पावत, उत्तराखंड- 262523
ORCID id www.orcid.org/0009-0005-3962-0893
सारांश : भारतीय समाज में नगरीकरण, प्रवासन, रोजगारगत गतिशीलता, वैवाहिक परिवर्तन तथा सामाजिक आधुनिकीकरण के कारण पारिवारिक संरचनाओं में उल्लेखनीय परिवर्तन हो रहे हैं। संयुक्त परिवारों के साथ-साथ एकल, एक-अभिभावकीय तथा पुनर्गठित परिवारों की उपस्थिति बढ़ने से बच्चों के सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक अनुभवों में भी विविधता उत्पन्न हुई है। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य बदलती पारिवारिक संरचनाओं, पारिवारिक अस्थिरता, अनुभूत पारिवारिक सहयोग, भावनात्मक तनाव तथा शैक्षिक आत्म-प्रभावकारिता के संदर्भ में बच्चों की शैक्षिक उपलब्धि का विश्लेषण करना था। अध्ययन में कक्षा छह से दस तक के 360 विद्यार्थियों को सम्मिलित किया गया। नमूने में संयुक्त, एकल, एक-अभिभावकीय तथा पुनर्गठित परिवारों के विद्यार्थी शामिल थे। अध्ययन में पारिवारिक वातावरण एवं संक्रमण प्रश्नावली, भावनात्मक तनाव मापनी, शैक्षिक आत्म-प्रभावकारिता मापनी तथा 100 अंकों का शैक्षिक उपलब्धि परीक्षण प्रयुक्त किया गया। परिणामों में पारिवारिक सहयोग का शैक्षिक उपलब्धि से सकारात्मक संबंध (r = .47, p < .001), शैक्षिक आत्म-प्रभावकारिता का सकारात्मक संबंध (r = .52, p < .001) तथा भावनात्मक तनाव का नकारात्मक संबंध (r = -.41, p < .001) पाया गया। पारिवारिक अस्थिरता भी उपलब्धि से नकारात्मक रूप से संबंधित थी (r = -.36, p < .001)। बहु-प्रतिगमन विश्लेषण ने उपलब्धि में 42 प्रतिशत विचरण की व्याख्या की। निष्कर्ष संकेत करते हैं कि परिवार का केवल संरचनात्मक स्वरूप नहीं, बल्कि उसकी स्थिरता, सहयोग, संवाद, आर्थिक-सामाजिक संसाधन तथा बच्चे की मनोवैज्ञानिक सुरक्षा शैक्षिक परिणामों के लिए अधिक महत्वपूर्ण हैं।
मुख्य शब्द: पारिवारिक संरचना, शैक्षिक उपलब्धि, भावनात्मक तनाव, पारिवारिक सहयोग, आत्म-प्रभावकारिता, पारिवारिक अस्थिरता
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