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DOI: https://doi.org/10.63345/ijrhs.net.v12.i8.2
सीमा देवी
शोधार्थी
देश भगत विश्वविद्यालय, मंडी गोविंदगढ़ (पंजाब), भारत
डॉ० अरविन्द्र कौर चुंबर
शोध मार्गदर्शिका
देश भगत विश्वविद्यालय, मंडी गोविंदगढ़ (पंजाब), भारत
सारांश— समकालीन हिंदी कथा साहित्य भारतीय समाज में घटित सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक परिवर्तनों का सशक्त दर्पण है। इस साहित्यिक धारा में ग्रामीण जीवन, लोक-संस्कृति, सामाजिक विषमताएँ, जातिगत संरचनाएँ, पर्यावरणीय संकट तथा बदलते मानवीय संबंधों का यथार्थपरक चित्रण विशेष रूप से देखने को मिलता है। एस.आर. हरनोट समकालीन हिंदी कथा साहित्य के ऐसे महत्वपूर्ण कथाकार हैं जिन्होंने हिमालयी ग्रामीण समाज की जटिलताओं, लोक-विश्वासों, सामाजिक रूढ़ियों, दलित चेतना, स्त्री-अनुभवों तथा विकासजनित चुनौतियों को अपनी कहानियों में प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया है। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य एस.आर. हरनोट के कथा-साहित्य के विशेष संदर्भ में सामाजिक चेतना और ग्रामीण जीवन के विविध आयामों का विश्लेषण करना है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि हरनोट की कहानियाँ केवल ग्रामीण जीवन का चित्रण नहीं करतीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन, मानवाधिकार, पर्यावरण संरक्षण तथा सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण प्रश्नों को भी सामने लाती हैं। उनकी रचनाएँ समकालीन समाज की समस्याओं और संभावनाओं दोनों को उजागर करती हैं। इस प्रकार, एस.आर. हरनोट का कथा-साहित्य सामाजिक सरोकारों और ग्रामीण यथार्थ की गहन समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करता है।
बीज शब्द— सामाजिक चेतना, ग्रामीण जीवन, समकालीन हिंदी कथा साहित्य, एस.आर. हरनोट, हिमाचली समाज, लोकसंस्कृति
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