![]()
Certificate: View Certificate
Published Paper PDF: Download PDF
Confirmation Letter: View
DOI: https://doi.org/10.63345/ijrhs.net.v14.i4.1
डॉ. अरविन्द कुमार
बी.ए., एल.एल.बी.,
राजनीति विज्ञान विभाग, विभागाध्यक्ष,
सरस्वती विद्या मंदिर लॉ कॉलेज शिकारपुर, बुलंदशहर
सारांश— भारतीय संघवाद एक विशिष्ट संरचना प्रस्तुत करता है जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन संवैधानिक रूप से निर्धारित किया गया है। यह व्यवस्था एक ओर राष्ट्रीय एकता और अखंडता को बनाए रखने का प्रयास करती है, वहीं दूसरी ओर राज्यों को प्रशासनिक और विधायी स्वायत्तता भी प्रदान करती है। भारतीय संविधान की संघीय व्यवस्था में केंद्र को अपेक्षाकृत अधिक शक्तियाँ दी गई हैं, जिससे इसे अर्ध-संघीय या संघीय-एकात्मक मिश्रित प्रणाली के रूप में भी देखा जाता है। राज्य स्वायत्तता का प्रश्न समय-समय पर राजनीतिक, आर्थिक और प्रशासनिक संदर्भों में उभरता रहा है, विशेषकर वित्तीय संसाधनों के वितरण, नीति-निर्माण और कानून व्यवस्था के मामलों में। केंद्र-राज्य संबंधों में संतुलन बनाए रखने के लिए वित्त आयोग, अंतर-राज्य परिषद तथा विभिन्न संवैधानिक प्रावधान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह अध्ययन भारतीय संघवाद में राज्य स्वायत्तता और केंद्र के बीच संबंधों का विश्लेषण करता है तथा यह स्पष्ट करता है कि सहकारी संघवाद के माध्यम से ही एक प्रभावी और संतुलित शासन प्रणाली स्थापित की जा सकती है, जो देश की विविधता और विकास दोनों को सुदृढ़ करे।
संदर्भ सूची
- भारत का संविधान, भारत सरकार प्रकाशन, नई दिल्ली।
- लक्ष्मीकांत, एम. (2023). भारतीय राजव्यवस्था. मैक्ग्रा हिल एजुकेशन, नई दिल्ली।
- सरकारिया आयोग रिपोर्ट (1988), केंद्र-राज्य संबंधों पर रिपोर्ट, भारत सरकार।
- पंची आयोग रिपोर्ट (2010), केंद्र-राज्य संबंधों की समीक्षा, भारत सरकार।
- बाशु, डी.डी. (2019). भारत का संविधान: एक परिचय. लेक्सिसनेक्सिस, नई दिल्ली।
- जैन, एम.पी. (2018). भारतीय संवैधानिक विधि. वाधवा एंड कंपनी, नागपुर।
- वित्त आयोग की विभिन्न रिपोर्टें, भारत सरकार।
- अंतर-राज्य परिषद सचिवालय, भारत सरकार की आधिकारिक वेबसाइट।
- नीति आयोग (NITI Aayog) की रिपोर्टें और प्रकाशन।