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DOI: https://doi.org/10.63345/ijrhs.net.v14.i4.7
डॉ. ब्रजेश कुमार
एसोसिएट प्रोफेसर
डी.ए.वी. कॉलेज, बुलंदशहर
उत्तर प्रदेश, भारत
सार— आधुनिक भारत का स्वतंत्रता आंदोलन विश्व इतिहास के सबसे व्यापक, संगठित तथा जनआधारित राष्ट्रीय आंदोलनों में से एक था। यह आंदोलन केवल औपनिवेशिक शासन से राजनीतिक स्वतंत्रता प्राप्त करने तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका उद्देश्य भारतीय समाज में राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक एकता, लोकतांत्रिक मूल्यों तथा आत्मनिर्भरता की भावना का विकास करना भी था। प्रस्तुत शोधपत्र में राष्ट्रीय चेतना के विकास तथा स्वतंत्रता आंदोलन में विभिन्न सामाजिक वर्गों की जनभागीदारी का ऐतिहासिक एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन किया गया है। अध्ययन द्वितीयक स्रोतों पर आधारित है, जिसमें प्रमाणिक इतिहासकारों की पुस्तकों, शोध अध्ययनों तथा ऐतिहासिक अभिलेखों का उपयोग किया गया है। शोध से स्पष्ट होता है कि 1857 के विद्रोह से लेकर 1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति तक राष्ट्रीय चेतना क्रमशः विकसित हुई और उसने किसानों, मजदूरों, महिलाओं, विद्यार्थियों, व्यापारियों, बुद्धिजीवियों तथा आदिवासी समुदायों सहित समाज के लगभग प्रत्येक वर्ग को एक साझा राष्ट्रीय उद्देश्य से जोड़ा। महात्मा गांधी के नेतृत्व में स्वतंत्रता आंदोलन जनआंदोलन के रूप में परिवर्तित हुआ, जिससे भारतीय राष्ट्रवाद को व्यापक सामाजिक आधार प्राप्त हुआ। निष्कर्षतः स्वतंत्रता आंदोलन की सफलता का मूल कारण राष्ट्रीय चेतना का विकास तथा व्यापक जनसहभागिता थी, जिसने भारतीय लोकतंत्र और आधुनिक राष्ट्र-निर्माण की आधारशिला रखी।
कुंजी शब्द: राष्ट्रीय चेतना, जनभागीदारी, स्वतंत्रता आंदोलन, भारतीय राष्ट्रवाद, असहयोग आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन
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