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DOI: https://doi.org/10.63345/ijrhs.net.v14.i10.2
जितेंद्र
शोधार्थी
हिंदी विभाग
दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली
डॉ. संजय कुमार
शोध निदेशक
प्रोफेसर
राम लाल आनंद महाविधालय, दिल्ली विश्वविधालय
सारांश (Abstract)— अमरकांत हिंदी के उन कथाकारों में हैं जिन्होंने प्रेमचंद की यथार्थवादी परंपरा को नई कहानी के युग में आगे बढ़ाते हुए निम्न-मध्यवर्गीय जीवन की विडंबनाओं को गहन संवेदना एवं तीक्ष्ण व्यंग्य के साथ चित्रित किया। उनकी कहानी ‘डिप्टी कलक्टरी’ भारतीय मध्यवर्ग की उस मानसिकता का मार्मिक एवं व्यंग्यपूर्ण आख्यान है, जिसमें सरकारी पद: विशेषतः ‘डिप्टी कलक्टर’ जैसा प्रशासनिक पद: प्रतिष्ठा, शक्ति एवं सामाजिक श्रेष्ठता का परम प्रतीक बन जाता है। प्रस्तुत शोध पत्र इस कहानी में निहित सामाजिक व्यंग्य के विविध आयामों तथा नौकरशाही के यथार्थ की समालोचनात्मक पड़ताल करता है। अध्ययन यह दर्शाता है कि कहानी एक ओर मध्यवर्गीय पद-लालसा, दिखावे की संस्कृति एवं औपनिवेशिक मानसिकता पर व्यंग्य करती है, तो दूसरी ओर उस नौकरशाही-तंत्र के यथार्थ को उजागर करती है, जो जनता एवं सत्ता के बीच की दूरी, वर्चस्व एवं विडंबना पर टिका है। गुणात्मक एवं पाठ-विश्लेषणात्मक प्रविधि के माध्यम से यह पत्र कहानी की कथावस्तु, पात्र-योजना, भाषा एवं शिल्प का विश्लेषण करता है और यह प्रतिपादित करता है कि अमरकांत का व्यंग्य केवल उपहास नहीं, बल्कि सामाजिक आलोचना का सशक्त औज़ार है। निष्कर्षतः कहानी आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, जब ‘पद’ एवं ‘प्रतिष्ठा’ का मोह भारतीय समाज की चेतना में गहराई से व्याप्त है।
मुख्य शब्द (Keywords)— अमरकांत; डिप्टी कलक्टरी; सामाजिक व्यंग्य; नौकरशाही; मध्यवर्ग; नई कहानी; पद-लालसा; औपनिवेशिक मानसिकता
संदर्भ सूची
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