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DOI: https://doi.org/10.63345/ijrhs.net.v14.i7.4
डॉ. ओम प्रकाश
सहायक प्रोफेसर, अर्थशास्त्र विभाग
राजकीय महाविद्यालय, देवप्रयाग
जनपद टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड – 249301
ORCID iD: https://orcid.org/0009-0006-9922-8209
सारांश— उत्तराखंड एक प्रमुख पर्वतीय राज्य है, जिसकी ग्रामीण अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि, पशुपालन, वानिकी तथा प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित रही है। पिछले कुछ दशकों में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य आधारभूत सुविधाओं की सीमित उपलब्धता के कारण राज्य के पर्वतीय ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन की प्रवृत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस अध्ययन का उद्देश्य उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पलायन के सामाजिक एवं आर्थिक प्रभावों का विश्लेषण करना है। अध्ययन में वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक शोध पद्धति का उपयोग करते हुए द्वितीयक स्रोतों, जैसे उत्तराखंड ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग की रिपोर्टों, सरकारी दस्तावेजों, शोध-पत्रों तथा प्रामाणिक हिंदी साहित्य का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट हुआ कि पलायन के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि उत्पादन, स्थानीय रोजगार, कुटीर उद्योग एवं पारंपरिक आर्थिक गतिविधियाँ प्रभावित हुई हैं। इसके साथ ही अनेक गाँवों में जनसंख्या में कमी, कृषि भूमि का अनुपयोगी होना तथा सामाजिक-सांस्कृतिक संरचना में परिवर्तन जैसी समस्याएँ भी सामने आई हैं। दूसरी ओर, प्रवासी परिवारों द्वारा भेजी जाने वाली धनराशि से कुछ परिवारों की आय एवं जीवन स्तर में आंशिक सुधार देखा गया है, किन्तु यह स्थानीय आर्थिक विकास का स्थायी विकल्प सिद्ध नहीं हुआ। अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि कृषि विविधीकरण, ग्रामीण पर्यटन, स्वरोजगार, कौशल विकास, कुटीर उद्योगों के संवर्धन तथा आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाया जा सकता है। समन्वित एवं क्षेत्रविशेष आधारित विकास नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन से पलायन की प्रवृत्ति को नियंत्रित करते हुए उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में सतत एवं समावेशी विकास सुनिश्चित किया जा सकता है।
मुख्य शब्द— उत्तराखंड, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पलायन, सामाजिक प्रभाव, आर्थिक प्रभाव, ग्रामीण विकास, सतत आजीविका
संदर्भ
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- उत्तराखंड शासन. उत्तराखंड ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग: आधिकारिक पोर्टल. उपलब्ध: आधिकारिक वेबसाइट