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DOI: https://doi.org/10.63345/ijrhs.net.v14.i4.6
डॉ. वैशाली सिंह
सहायक प्रोफेसर
शिक्षा विभाग
श्रीमती अनार देवी टी.टी. कॉलेज
बखराना (कोटपूतली) बहरोड़, राजस्थान – 303108
सारांश— प्रस्तुत साहित्य समीक्षा से यह स्पष्ट होता है कि शिक्षा प्रणाली विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को गहराई से प्रभावित करती है। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में परीक्षा-केंद्रित दृष्टिकोण, अंक-आधारित मूल्यांकन, तीव्र प्रतिस्पर्धा, अभिभावकीय अपेक्षाएँ तथा करियर संबंधी दबाव विद्यार्थियों में तनाव, चिंता, अवसाद और भावनात्मक असंतुलन जैसी समस्याओं को जन्म देते हैं। अनेक अध्ययनों से यह प्रमाणित हुआ है कि अत्यधिक शैक्षणिक दबाव विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता, आत्मविश्वास और समग्र विकास को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। साहित्य यह भी दर्शाता है कि विद्यालय का वातावरण, शिक्षक का व्यवहार और शिक्षा प्रणाली की संरचना विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रमुख निर्धारक हैं। यदि विद्यालय में सहयोगात्मक, समावेशी और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध हो, तो विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, भावनात्मक स्थिरता और सकारात्मक सोच विकसित होती है। इसके विपरीत, दंडात्मक अनुशासन, असुरक्षित वातावरण और केवल परिणाम-केंद्रित शिक्षा विद्यार्थियों के मानसिक दबाव को बढ़ाते हैं। इसके अतिरिक्त, यह भी पाया गया कि मानसिक स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत स्तर की समस्या नहीं है, बल्कि यह शिक्षा प्रणाली की नीतियों और कार्यप्रणाली से जुड़ा एक व्यापक सामाजिक मुद्दा है। जीवन-कौशल शिक्षा, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियाँ, परामर्श सेवाएँ तथा मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता जैसे उपाय विद्यार्थियों के तनाव को कम करने और उनके समग्र विकास को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध होते हैं। अतः निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि शिक्षा प्रणाली को केवल अकादमिक उपलब्धि तक सीमित न रखकर विद्यार्थियों के मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक कल्याण पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है। एक संतुलित, लचीली और विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा व्यवस्था ही स्वस्थ एवं सशक्त भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
प्रमुख शब्द— विद्यार्थी मानसिक स्वास्थ्य, शिक्षा प्रणाली, शैक्षणिक तनाव, परीक्षा दबाव, विद्यालयी वातावरण, भावनात्मक संतुलन, अभिभावकीय अपेक्षाएँ, समग्र शिक्षा, मानसिक कल्याण, जीवन कौशल शिक्षा
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