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DOI: https://doi.org/10.63345/ijrhs.net.v6.i6.1
डॉ. मीनाक्षी बी. पाटील
हिन्दी विभाग
एस. बी. कला एवं के. सी. पी. विज्ञान महाविद्यालय, विजयपुर
कर्नाटक
शोध सार:
भारतीय साहित्य के इतिहास में ‘उपन्यास’ एक प्रमुख विधा है। कन्नड़ में उपन्यास के लिए ‘कादंबरी’ शब्द का प्रयोग किया जाता है। कन्नड़ का प्रथम मौलिक उपन्यास गुळवाड़ी (गुलवाड़ी) वेंकटराय द्वारा विरचित ‘इंदिराबाई’ है। इसे ‘सद्धर्म विजयवु’ भी कहा जाता है। यह कन्नड़ का प्रथम सामाजिक उपन्यास है। इसका प्रथम प्रकाशन मंगलौर के ‘बासेल मिशेन प्रेस’ के द्वारा सन् 1899 ई. में किया गया था। यह कन्नड़ का प्रथम उपन्यास होने के कारण कन्नड़ उपन्यास साहित्य में इसका विशेष स्थान रहा है। इसमें प्रमुखतः तत्कालीन समय के कुरीतियों, विधवा विवाह तथा स्त्री शिक्ष पर अधिक बल दिया गया है। इसके अतिरिक्त अंग्रेजी शिक्षा, पाश्चात्य सभ्यता-संस्कृति से प्रभावित युवकों का चित्रण किया गया है।
बीज शब्द: उपन्यास, कादंबरी, स्त्री शिक्षा, रुढ़ियाँ, अंधविश्वास ।
संदर्भ ग्रंथ सूची:
- शैलबाला, हिन्दी उपन्यास का प्रारंभिक विकास, सत्य सदन, सरावगी बाराबांकी, प्रथम संस्करण-1973, पृ. सं- 11
- सं- राजप्पा दलवायी, कन्नड़ साहित्य कोश, दलवायी प्रकाशन, अध्यापक निवास, ज्ञानभारती, बेंगलौर विश्वविद्यालय, बेंगलौर-56, सातवां संस्करण-2010, पृ. सं- 102
- जी. एस. आमूर, कन्नड़ कथन साहित्य: कादंबरी, श्रीहरी प्रकाशन, भारती, नवोदयनगर, धारवाड़-03, पृ. सं -24
- डॉ. हरिकृष्ण भरण्य, होसगन्नड़ साहित्यद उगम मत्तु विकास, प्रभास बिडुगड़े, मदुरै-21, प्रथम संस्करण- 1990, पृ.सं- 56
- गुलवाड़ी वेंकटराय, इंदिराबाई, कन्नड़ प्रपंच प्रकाशन, कदरी, मंगलौर-2, पुनर्मुद्रित संस्करण-1962, पृ. सं – vi
- वही, पृ सं – iv
- वही, पृ. सं – 152
- वही, पृ. सं – 153