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DOI: https://doi.org/10.63345/ijrhs.net.v14.i5.5
मीना कुमारी
शोधार्थी
मनोविज्ञान विभाग
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय
दरभंगा, बिहार
प्रो. (डॉ.) बिनय कुमार
शोध निर्देशक / शोध पर्यवेक्षक
मनोविज्ञान विभाग
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय
दरभंगा, बिहार
सारांश— प्रस्तुत अध्ययन “वैवाहिक समायोजन पर चिंता, संवेगात्मक बुद्धि एवं व्यक्तित्व के प्रभाव का अध्ययन” विषय पर आधारित है। वैवाहिक समायोजन दाम्पत्य जीवन की सफलता, संतुष्टि तथा पारिवारिक स्थिरता का एक महत्वपूर्ण संकेतक है। वर्तमान समय में बढ़ते मानसिक तनाव, चिंता, भावनात्मक चुनौतियों तथा व्यक्तित्वगत भिन्नताओं के कारण वैवाहिक संबंधों में अनेक प्रकार की समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं। इसी संदर्भ में यह अध्ययन चिंता, संवेगात्मक बुद्धि एवं व्यक्तित्व जैसे मनोवैज्ञानिक कारकों के वैवाहिक समायोजन पर प्रभाव का विश्लेषण करता है। अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह जानना है कि चिंता, संवेगात्मक बुद्धि और व्यक्तित्व वैवाहिक समायोजन को किस प्रकार प्रभावित करते हैं। शोध में वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक पद्धति का उपयोग किया गया है। अध्ययन के लिए संबंधित पुस्तकों, शोध-पत्रों, जर्नलों तथा पूर्ववर्ती अध्ययनों से प्राप्त द्वितीयक आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। उपलब्ध साहित्य के आधार पर इन मनोवैज्ञानिक कारकों और वैवाहिक समायोजन के मध्य संबंधों का परीक्षण किया गया। अध्ययन के निष्कर्षों से ज्ञात हुआ कि उच्च स्तर की चिंता वैवाहिक समायोजन को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है, जबकि उच्च संवेगात्मक बुद्धि दाम्पत्य संबंधों में बेहतर संवाद, सहानुभूति एवं संतुष्टि को बढ़ावा देती है। इसी प्रकार सकारात्मक व्यक्तित्व गुण वैवाहिक जीवन में सहयोग, समझदारी तथा अनुकूलन क्षमता को सुदृढ़ करते हैं। निष्कर्षतः यह कहा जा सकता है कि स्वस्थ एवं संतोषजनक वैवाहिक जीवन के लिए चिंता का प्रभावी प्रबंधन, संवेगात्मक बुद्धि का विकास तथा सकारात्मक व्यक्तित्व विशेषताओं का संवर्धन अत्यंत आवश्यक है।
मुख्य शब्द— वैवाहिक समायोजन, चिंता, संवेगात्मक बुद्धि, व्यक्तित्व, दाम्पत्य संबंध, मानसिक स्वास्थ्य।
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