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DOI: https://doi.org/10.63345/ijrhs.net.v14.i7.2
डॉ. सीमा रानी
सह-प्राध्यापक, समाजशास्त्र विभाग
राजकीय डिग्री कॉलेज, जहाँगीराबाद
जनपद बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश, भारत
सारांश— भारतीय समाज में संयुक्त परिवार से एकल परिवार की ओर बढ़ती प्रवृत्ति पिछले कुछ दशकों में तीव्र सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक परिवर्तनों का परिणाम है। औद्योगीकरण, नगरीकरण, शिक्षा का विस्तार, महिलाओं की बढ़ती आर्थिक भागीदारी, रोजगार-आधारित प्रवास तथा वैश्वीकरण ने पारिवारिक संरचना और पारस्परिक संबंधों को नए स्वरूप प्रदान किए हैं। पूर्ववर्ती अध्ययनों में मुख्यतः संयुक्त एवं एकल परिवारों की संरचनात्मक विशेषताओं, जनसांख्यिकीय परिवर्तनों अथवा आर्थिक प्रभावों का पृथक-पृथक विश्लेषण किया गया है। अधिकांश शोध परिवार के आकार या निवास व्यवस्था तक सीमित रहे हैं, जबकि बदलते सामाजिक मूल्यों, पीढ़ीगत संबंधों, भावनात्मक समर्थन, वृद्धजनों की देखभाल, महिलाओं की निर्णयात्मक भूमिका, डिजिटल संचार तथा भौगोलिक दूरी के बावजूद बने रहने वाले पारिवारिक संबंधों का समग्र अध्ययन अपेक्षाकृत सीमित है। इसी प्रकार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच इस परिवर्तन की तुलनात्मक सामाजिक व्याख्या तथा पारंपरिक संयुक्त परिवार के आधुनिक रूपांतरण पर भी पर्याप्त शोध उपलब्ध नहीं है। उपस्थित अध्ययन इन शोध-अंतरालों को ध्यान में रखते हुए भारतीय समाज में संयुक्त परिवार से एकल परिवार की ओर बढ़ती प्रवृत्ति का बहुआयामी सामाजिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। यह अध्ययन परिवार को केवल सह-निवास की इकाई के रूप में न देखकर सामाजिक सहयोग, आर्थिक परस्पर निर्भरता, भावनात्मक संबंध, सांस्कृतिक निरंतरता तथा डिजिटल माध्यमों से संचालित विस्तारित पारिवारिक नेटवर्क के संदर्भ में समझने का प्रयास करता है। साथ ही, यह शोध महिलाओं की बदलती भूमिका, युवाओं की जीवनशैली, वृद्धजनों की सामाजिक सुरक्षा, बच्चों के समाजीकरण तथा पारिवारिक मूल्यों में हो रहे परिवर्तन के मध्य अंतर्संबंधों का समेकित विश्लेषण करता है। अध्ययन का एक अन्य नवीन पक्ष यह है कि इसमें पारंपरिक संयुक्त परिवार और आधुनिक एकल परिवार को परस्पर विरोधी अवधारणाओं के रूप में नहीं, बल्कि बदलती सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप विकसित हो रहे एक सतत पारिवारिक संक्रमण के रूप में देखा गया है। यह शोध भारतीय सामाजिक संरचना में परिवार संस्था के वर्तमान स्वरूप, उसकी चुनौतियों एवं संभावनाओं को समझने के साथ-साथ भविष्य की सामाजिक नीतियों, पारिवारिक कल्याण कार्यक्रमों, वृद्धजन देखभाल, महिला सशक्तिकरण तथा सामाजिक विकास से संबंधित नीति-निर्माण के लिए उपयोगी आधार प्रदान करने का प्रयास करता है। इस प्रकार अध्ययन भारतीय परिवार व्यवस्था के परिवर्तन को समग्र सामाजिक दृष्टिकोण से समझने की दिशा में एक मौलिक एवं समसामयिक योगदान प्रस्तुत करता है।
मुख्य शब्द— संयुक्त परिवार, एकल परिवार, सामाजिक संरचना, भारतीय समाज, पारिवारिक परिवर्तन, नगरीकरण, आधुनिकीकरण, महिला सशक्तिकरण, वृद्धजन, सामाजिक परिवर्तन.
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