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DOI: https://doi.org/10.63345/ijrhs.net.v12.i12.1
गौरव जोशी
रिसर्च स्कॉलर
महाराजा अग्रसेन हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय
उत्तराखंड, भारत
डॉ सारिका गोयल
अनुसंधान गाइड
महाराजा अग्रसेन हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय
उत्तराखंड, भारत
सार— भारत की प्राचीन शिक्षण परंपरा और आधुनिक शिक्षा नीति दो अलग-अलग युगों की शैक्षिक दृष्टियों का प्रतिनिधित्व करती हैं, किंतु दोनों का मूल उद्देश्य व्यक्ति और समाज का समग्र विकास ही रहा है। प्राचीन काल में शिक्षा का स्वरूप मुख्यतः गुरुकुल व्यवस्था पर आधारित था, जहाँ ज्ञान का संचार गुरु और शिष्य के प्रत्यक्ष संबंध के माध्यम से होता था। शिक्षा केवल बौद्धिक प्रशिक्षण तक सीमित नहीं थी, बल्कि उसमें नैतिकता, अनुशासन, आध्यात्मिकता, आत्मनिर्भरता और प्रकृति के साथ सामंजस्य जैसे मूल्यों को भी समान महत्व दिया जाता था।
इसके विपरीत, आधुनिक शिक्षा नीति—विशेषकर नई शिक्षा नीति 2020—वैश्विक प्रतिस्पर्धा, तकनीकी प्रगति और ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित की गई है। इसमें संरचनात्मक सुधार, बहुविषयक अध्ययन, डिजिटल संसाधनों का उपयोग, कौशल विकास और अनुसंधान को बढ़ावा देने जैसे तत्व प्रमुख हैं। आधुनिक नीति का उद्देश्य शिक्षा को अधिक समावेशी, लचीला और रोजगारोन्मुख बनाना है, ताकि विद्यार्थी बदलते समय की चुनौतियों का सामना कर सकें।
तुलनात्मक दृष्टि से देखा जाए तो प्राचीन शिक्षा में व्यक्तिगत मार्गदर्शन, मूल्य-आधारित शिक्षण और जीवन-कौशल पर विशेष बल था, जबकि आधुनिक शिक्षा प्रणाली में संस्थागत ढाँचा, मानकीकृत पाठ्यक्रम और तकनीकी एकीकरण प्रमुख हैं। प्राचीन व्यवस्था में शिक्षा सीमित वर्गों तक केंद्रित थी, जबकि आधुनिक नीति सार्वभौमिक और समान अवसर प्रदान करने की दिशा में कार्यरत है।
दोनों व्यवस्थाओं के बीच अंतर होने के बावजूद, एक महत्वपूर्ण समानता यह है कि दोनों ही शिक्षा को समाज के नैतिक और बौद्धिक उत्थान का साधन मानती हैं। वर्तमान समय में आवश्यकता इस बात की है कि प्राचीन परंपराओं के मूल्य-आधारित दृष्टिकोण और आधुनिक शिक्षा नीति की वैज्ञानिक एवं तकनीकी दृष्टि के मध्य संतुलन स्थापित किया जाए। ऐसा संतुलन शिक्षा को अधिक मानवीय, व्यावहारिक और भविष्य उन्मुख बना सकता है।
प्रमुख शब्द— प्राचीन शिक्षण परंपरा, गुरुकुल व्यवस्था, मूल्य-आधारित शिक्षा, आध्यात्मिक विकास, आधुनिक शिक्षा नीति, नई शिक्षा नीति 2020, बहुविषयक अध्ययन
संदर्भ
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- भारत सरकार, शिक्षा मंत्रालय. (2020). राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020. https://www.education.gov.in/sites/upload_files/mhrd/files/nep/NEP_Final_Hindi_0.pdf
- PRS Legislative Research. (2020). National Education Policy 2020 – Key Highlights. https://prsindia.org/policy/report-summaries/national-education-policy-2020
- Altekar, A. S. (1944). Education in Ancient India. Banaras Hindu University Press.
- Mookerji, R. (1951). Ancient Indian Education: Brahmanical and Buddhist. Motilal Banarsidass Publishers.
- Tilak, J. B. G. (2019). Education and Development in India.
- (2021). Reimagining Our Futures Together: A New Social Contract for Education. https://unesdoc.unesco.org/ark:/48223/pf0000379707